शायरी
- shubham gadre

- Nov 25, 2018
- 1 min read
यूं तो तुझे मिलनेसे परहेज मैं करता हूँ,
डरता हूँ, कही तुझे दिल ना दे बैठू l
मिलता हूँ, लेकिन बोलनेसे परहेज करता हूँ,
डरता हूँ, खाली हात ना लौटू l
- शुभम गद्रे

यूं तो तुझे मिलनेसे परहेज मैं करता हूँ,
डरता हूँ, कही तुझे दिल ना दे बैठू l
मिलता हूँ, लेकिन बोलनेसे परहेज करता हूँ,
डरता हूँ, खाली हात ना लौटू l
- शुभम गद्रे
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