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शायरी

दिल भी साला अजीब है, साथ है पर पास नही, और वक्त भी साला अजीब है, पास है पर साथ नही... - शुभम गद्रे

शायरी

यूं तो तुझे मिलनेसे परहेज मैं करता हूँ, डरता हूँ, कही तुझे दिल ना दे बैठू l मिलता हूँ, लेकिन बोलनेसे परहेज करता हूँ, डरता हूँ, खाली हात...

शब्द झाले बोलके...

भावना आसवांशी अनोळखीशा वागल्या, अन भावना शब्दांत माझ्या व्यक्त होऊ लागल्या.. आसवांच्या सरी गेल्या, कमी झाले मोल ते, मी निशब्द जाहलो अन,...

शायरी

खामोशी से भरी, मेरी ये गुफ्तगू, कैसे तुझतक पोहची, खुदा जाने, तुम्हारे दिलकी किताब मैं, लिखा हुआ, मेरा किरदार क्या है, वो भी खुदा जाने। -...

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