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संदेसा

  • Writer: shubham gadre
    shubham gadre
  • Nov 25, 2018
  • 1 min read

बहोत कूछ केहना है तुम्हे,

दिल मे हि रेह गया,

बोतल मै छिपा संदेसा,

समुंदर मै खो गया।


लेहरोंसे गुजरती आज, कश्ती मेरी लेकीन, कल का सवेरा मुझे, तुझतक ले गया।


- शुभम गद्रे

 
 
 

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दिल भी साला अजीब है, साथ है पर पास नही, और वक्त भी साला अजीब है, पास है पर साथ नही... - शुभम गद्रे

 
 
 

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